गम-ए-फुरक़त में इतना भी डूबो ना तुम,
एक अरसे से कोई ख़बर नहीं
आहिस्ता-आहिस्ता भूलना मुझे,
इतना आसान अगर नहीं
तुझे देखे मगर, कहे देखा नहीं,
ऐसी तो मेरी नज़र नहीं
तुझे देखे बगैर भी देखे तुझे,
बिन देखे तुझे, बसर नहीं
हिम्मत तो मुझ में खूब मगर,
पर कैसे कहूँ कि डर नहीं
ख़ुद रखना ख्याल अब अपना ज़रा,
दुआओं में मेरी असर नहीं
इन दरीचों से देखूँ किसको मैं अब,
अब गाँव में तेरा घर नहीं
कश-म-कश-ए-दिल चल तुझ से कहूँ,
रूबरू भी तो मगर नहीं...
गम-ए-फुरक़त = sorrow of separation
आहिस्ता = slowly
बसर = survival
दरीचा = window
कश-म-कश-ए-दिल = dilemma
रूबरू = face-to-face