तू खुश नहीं ?
क्या ग़म है जो सता रहा है ?
क्या ग़म है जो सता रहा है ?
तेरे होंठों की हँसी कुछ कहती नहीं,
मगर आँसू कुछ बता रहा है !
उसके होंठों पर हमेशा मुस्कान देखी है,
अपने लिए दो आँसू भी आँखों में देखे नहीं कभी...
होंठों पर तो मेरे भी मुस्कान रहती है,
पर यूँ आँखों में आँसू मैंने रोके नहीं कभी...
कुछ ज़ुबाँ से नहीं बताते,
बस रोते हैं तन्हाई में,
यूँ आँसू नहीं दिखाते...
तू कहाँ उन जैसा,
जो हर पल मुस्कुराते
वो रो चुके हैं इतना,
अब आँसू नहीं आते...






















