
जो कहते हैं, उन्हें कहने दो,
आज सुनने का कुछ दिल नहीं
ये आँखें भी बंद रहने दो,
अब इतना भी मुश्किल नहीं...
दिल इतना भी जाहिल नहीं...

तकरारों के सबब बोहत
कि माँगा था, हासिल नहीं
तेरे लहजों से पर, वाकिफ़ मैं
गिला शौकों में शामिल नहीं...

बस कश्ती भर का गाँव है,
खुशकिस्मत हम काबिल नहीं,
जो टूटी-फूटी नाँव है

तकरारों के सबब बोहत
कि माँगा था, हासिल नहीं
तेरे लहजों से पर, वाकिफ़ मैं
गिला शौकों में शामिल नहीं...

बस कश्ती भर का गाँव है,
खुशकिस्मत हम काबिल नहीं,
जो टूटी-फूटी नाँव है
और मीलों तक साहिल नहीं...
महफ़िल = gathering
जाहिल = illiterate, ignorant
सबब = reasons
हासिल = gain, achieve
लहजा = the twinkle of an eye, glance
वाकिफ़ = acquainted, aware
गिला = grudge
शौक़ = hobby, interest
शामिल = included
काबिल = able, worthy


2 comments:
जो कहना है, कह डालो तुम,
कहते हो तुम, ये ही सही...
कैसे और क्या हम कह जाएँ,
जब तुम्हारा सुनने का कुछ दिल नहीं...
मीलों तक ना साहिल भी हो,
साथ जो मिले उनका,
टूटी फूटी नाव सही,
साथ चल निकलेगे तो सही....
what a wonderful reply ! u seem to have reminded of someone very special :)...god bless..
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