
दिल आदत से मजबूर है
कुछ फर्क है क्या उस में मुझ में,
कुछ फर्क है क्या उस में मुझ में,
वो क्यों मुझसे दूर है ?
मैं जिंदा उसके बिना भी हूँ,
मैं जिंदा उसके बिना भी हूँ,
मेरी सज़ा है ये या कुसूर है
क्यों आती नहीं अब मौत मुझे,
क्यों आती नहीं अब मौत मुझे,
पर तू फितरत से मजबूर है
वो जहाज़ सीधा सादा सा,
वो जहाज़ सीधा सादा सा,
तू कश्ती फिर भी गुरूर है
वो डूब रहे किनारों पर,
वो डूब रहे किनारों पर,
तेरा साहिल ज़रा दूर है
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
कुछ फर्क तो ज़रूर है…
तेरी किस्मत एक आँख में,
पर तू फितरत से मजबूर है
वो हकीकत सीधी सच्ची सी,
वो हकीकत सीधी सच्ची सी,
तू ख़्वाब तुझे गुरूर है
अब टूट रहा तू आँखों में,
अब टूट रहा तू आँखों में,
तू झूठा तेरा कुसूर है
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
कुछ फर्क तो ज़रूर है…
तेरी किस्मत एक उफान में,
पर तू फितरत से मजबूर है
वो तूफ़ान सीधा सादा सा,
वो तूफ़ान सीधा सादा सा,
तू लहर फिर भी गुरूर है
क्यों लगाव अपनी हस्ती से इतना,
क्यों लगाव अपनी हस्ती से इतना,
जब मिटना एक दिन ज़रूर है
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
कुछ फर्क तो ज़रूर है…
तेरी किस्मत किसी की दुआ में,
तेरी किस्मत किसी की दुआ में,
वो भी फितरत से मजबूर है
मैंने दी थी मौत सौगात में,
मैंने दी थी मौत सौगात में,
तेरी हर दुआ मंज़ूर है
ये असर है उसकी दुआ में कुछ,
ये असर है उसकी दुआ में कुछ,
जो ज़हर भी मजबूर है
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
तू ज़रा भी नहीं उसके जैसा,
कुछ फर्क तो ज़रूर है…




