ये शाम भी अजीब है, ये दिन नहीं, ये रात नहीं
पर कैसा ये नसीब है,
शाम है, मुलाक़ात नहीं...!
मोहब्बत एक तहज़ीब है,
कोई उम्र नहीं कोई जात नहीं
पर कैसा ये नसीब है,
वो साथ सही, हालात नहीं...!
आज रूठा मेरा हबीब है,
वो कहता, मुझे वो याद नहीं
पर कैसा ये नसीब है,
वो तड़पा, मुझे एहसास नहीं...!
ये वक़्त बड़ा रकीब है,
एक अरसे से जो बात नहीं
पर कैसा ये नसीब है,
आज वक़्त है, अल्फाज़ नहीं...!
तहज़ीब = refinement
उम्र = age
जात = caste
हालात = circumstances
हबीब = beloved, sweetheart, friend
रकीब = opponent, enemy
रकीब = opponent, enemy
वक़्त = time
अल्फाज़ = words



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