यूँहीं निकला था घर से,
देखने नया आशियाना कोई
ये बादल आज ही क्यों बरसे,
क्यों भीगा मैं, बताना कोई...

जो रोए भीगने के डर से,अब क्या बने उसका सहारा कोई...
गर करता तू मोहब्बत दिल से,तो समझता इशारा कोई...
ये बादल यूँहीं नहीं बरसे,आज फिर रोया है दीवाना कोई...
तू है जब दिल में उसके,क्यों ढूँढता है ठिकाना कोई ?

2 comments:
तू है जब दिल में उसके,
क्यों ढूँढता है ठिकाना कोई ?
सही जा रहे हो बच्चे ।
:-P...
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