किसी को नफ़रत बेपनाह मिलती है
हमें बेगानों से वफ़ा मिलती है,
हर खता पर दुआ मिलती है
हर खता पर दुआ मिलती है
वो खुशकिस्मत, जिन्हें 'हाँ' मिलती है,
पर ऐसी किस्मत ही कहाँ मिलती है
ना सुकूँ मिलता है, ना सज़ा मिलती है
बस कश-म-कश हर जगह मिलती है...!
ना सुकूँ मिलता है, ना सज़ा मिलती है
बस कश-म-कश हर जगह मिलती है...!
तब ना रात को सुबह मिलती है
अब ना बात को वजह मिलती है,
बस आँख को ज़ुबां मिलती है...
जो आँख को ज़ुबां मिलती है,
ना होंठ को खता मिलती है
तुझे ना दर्द, ना सज़ा मिलती है,
फिर कश-म-कश कहाँ मिलती है ?
हमें तारीफें बेवजह मिलती हैं
अब ना जीने की वजह मिलती है,
ना मरने की जगह मिलती है
वो खुशकिस्मत गर निगाह मिलती हैं
पर ऐसी किस्मत ही कहाँ मिलती है
ना दम घुटता है, ना हवा मिलती है
बस कश-म-कश हर जगह मिलती है..!
किसी को चीख़ बेज़ुबां मिलती है,किसी को ख़ामोशी एक अदा मिलती है
समझ दोस्त की तरह मिलती है,
ये कश-म-कश अब जहाँ मिलती है...!

4 comments:
jo hai thik hai. narayan narayan
ब्लॉग की प्रस्तुति आकर्षक है...
सुस्वागतम्.....
बहुत खूब
Thanks :)
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