
निकलती है धूप जहाँ से,
घर वहाँ बनाओ तुम,
निकला करो फिर ज़रा,
तुम धूप की तरह…
घर वहाँ बनाओ तुम,
निकला करो फिर ज़रा,
तुम धूप की तरह…
कोई पूछे, कहाँ जा रहे,
बस ‘धूप’ नाम बताओ तुम,
बिखर जाओ हर जगह,
तुम धूप की तरह...
मैं बादलों में कहीं,
धूप से मिला नहीं,
कहो, रूठ नहीं जाओगे,
तुम धूप की तरह...
जो छू ना सकूँ तुम्हें,
कोई रश्क, कोई गिला नहीं,
पर आओगे ना रोज़ रोज़,
तुम धूप की तरह...
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