मैंने कहा, गमों को सजाया नहीं करते
तन्हा, यूँ ख़ुद को, सताया नहीं करते
कहा उसने, यादें मिटाया नहीं करते
कोई लम्हा, हम तन्हा, बिताया नहीं करते...
मैंने कहा, हक क्यों जताया नहीं करते
क्यों अपने खुदा को, समझाया नहीं करते
कहा उसने, नसीब हम बनाया नहीं करते
यूँ खुदा पे इल्ज़ाम, पर लगाया नहीं करते...
मैंने कहा, दिल को दुखाया नहीं करते
क्यों हाल-ए-दिल अपना, सुनाया नहीं करते
कहा उसने, मसरूफ़ तुम, आया नहीं करते
शायद दोस्तों में वक़्त, अब ज़ाया नहीं करते...
मैंने कहा, दर्द को छुपाया नहीं करते
यूँ अपनों को दिल से पराया नहीं करते
कहा उसने, ज़ख्म सब दिखाया नहीं करते
तुम अपने, पराये रुलाया नहीं करते...!
मसरूफ़ = busy
वक़्त = time
ज़ाया = to waste
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