बेशक, नहीं वो रूबरू,
कुछ आँखों से झलकता नहीं...
पर गुफ्तुगू तो नसीब है,
इस दिल से कुछ छुपता नहीं....!
वो कशिश है उसकी आवाज़ में,
सुन वक़्त भी रुकता वहीं...
सौ ग़म भी गर फिर साथ में,
ये दिल कभी दुखता नहीं...!
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वो यकीं करता यूँहीं मुझ पर,
सच-झूठ परखता नहीं...
तारीफें करता रात-दिन,
कोई ऐब मगर दिखता नहीं...!
वो मिलना तो मुमकिन नहीं,
ख़ुदा किस्मत में लिखता नहीं...
इस रिश्ते की पर कीमत क्या,
बाज़ारों में बिकता नहीं...!
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काश चलता रहे वो साथ मेरे,
तो क्या अगर रस्ता नहीं...
दिल पागल, ख़्वाब देख रहा,
हकीकत कुछ समझता नहीं...!
जो बादलों से बरसता नहीं...
जब झूठ कहा था होठों ने,
दिल मिलने को तरसता नहीं...!






2 comments:
यूँ ही कोई किसी पर यकीं नही करता,
जिसमे न कोई ऐब दिखे,
उसमे ही,सच-झूठ नहीं दिखता...
मेरी बात का यकीन करो वरुण!!!
साथ चलते रहो उसके,
खुदा मंज़िल की किस्मत मे
उसका नाम ज़रूर लिखेगा...
bohat sahi kahaa hai aapne...i trust you on that...
n thanks a lot for your wishes :)...i owe you for this..
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