
वो बोला, ये दीया बिन बाती गरीब है
चंद लम्हात ही ये साथी करीब है
चंद लम्हात ही ये साथी करीब है
फिर तन्हा रहूँ, ये मेरा नसीब है…
बस परछाई नहीं, सब साथी करीब हैं
पर गैरत से ज़्यादा, गर दौलत अज़ीज़ है
मुझे क्या पता ये इश्क क्या चीज़ है…
वो बोला, मैं अश्क, इश्क मेरा हबीब है
मिले आँख में पनाह, वो पल तो हसीन हैं
फिर बहने लगूँ ये मेरा नसीब है…
उसे ही मिलता बस दर्द, जो मेरे करीब है
ना आँख में हया, ना बात में तमीज़ है
मुझे क्या पता ये इश्क क्या चीज़ है…
दीवाने से पूछा, ये इश्क क्या चीज़ है
वो बोला, दीवाना अब दिल का मरीज़ है
जो रूह था कभी, याद-ए-तावीज़ है
पर बढ़ता रहे, ये मर्ज़ ही अजीब है...
पर बढ़ता रहे, ये मर्ज़ ही अजीब है...
याद भी नहीं, ना दिल को तकलीफ है
मैं दीवाना नहीं, सब झूठी तहज़ीब है
मुझे क्या पता ये इश्क क्या चीज़ है…
वो बोला, ये इश्क एक तोहफा सईद है
ना इश्क में गुज़ारिश, ना कोई ताकीद है
ना शक की गुंजाइश, ना हक की रसीद है
ना बंदिश, ना वादा, ना कोई उम्मीद है
दिल मेरा बस यूँहीं, इश्क का मुरीद है
मुझे क्या पता ये इश्क क्या चीज़ है…
रकीब = opponent, enemy
हबीब = beloved, sweetheart, friendतमीज़ = etiquettes
सईद = auspicious, fortunate
गुज़ारिश = request
ताकीद = order, reminder
रसीद = receipt
खरीद = purchase
बंदिश = restriction, condition
उम्मीद = expectation
मुरीद = admirer, desirer




3 comments:
ना इश्क में सौदा, ना कोई खरीद है
ना बंदिश, ना वादा, ना कोई उम्मीद है
दिल मेरा बस यूँहीं, इश्क का मुरीद है
मुझे क्या पता ये इश्क क्या चीज़ है…
वाह ।
Hey Varun !!!
Simply Beautiful !!!
I love it...
@Asha mam and Nidhi...thanks a lot :)
I don't know how all of you on web are coming across this blog...so far I've shared the link only with a couple of frnz...may be, m going to get some new frnz here...thanks again for reading...! :)
Post a Comment